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द गर्ल इन रूम 105

"हां, इसके बावजूद वो दोनों एक-दूसरे के साथ इनवॉल्व हुए। मैं अच्छे से अच्छे शब्दों का इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहा था और 'इनवॉल्वड' जैसा सॉफ़्ट शब्द

उपयोग में ला रहा था। लेकिन मेरा मानना है कि रघु की जगह कोई भी होता तो उसके दिमाग़ में यही गूंजता कि

कोई और उसकी गर्लफ्रेंड के साथ सो रहा है।

'रघु? यू देवर?' "तुम्हारे पास सबूत हैं?"

'पुख्ता सबूत।' 'फकिंग बास्टर्ड ।'

शायद कोई पुच्छल तारा उसी समय धरती के समीप से गुज़रा होगा, क्योंकि यह पहली बार था, जब मैंने

रघु को कोई गाली देते सुना हो।

'लेकिन स्टुपिड पुलिस के पास मत जाना। मैंने भी कुछ दिन पहले राणा को फोन लगाया था।" "हां, इस मामले के बारे में जानने के लिए मैं जब-तब उसे फोन लगाता रहता हूं। लेकिन ऐसा लगता है कि

'फोन लगाया था?'

वो वॉचमैन थ्योरी से ही खुश है और लक्ष्मण को जेल में रखने के लिए तैयार है।"

'हां, क्योंकि उसके लिए यही फ़ायदेमंद है।' "राणा सब गड़बड़ कर देगा। और फ़ैज़ आर्मी में होने के कारण बच निकलेगा।' "मैंने भी ठीक यही सोचा था। इसीलिए हम वो कार्यक्रम करवा रहे हैं।'

मुझे यह देखकर अच्छा लगा था कि रघु जैसा स्मार्ट आदमी भी उसी लाइन पर सोच रहा था, जिस पर मैं

सोच चुका था।

क्या फ़ैज़ को ज़रा भी आइडिया है कि तुम उसका राज़ जान चुके हो?"

"नहीं।'

'गुड अब तो मैं ज़रूर वहां आऊंगा। 20 को है ना?" 'हो।"

''मैं तुम्हें वहीं मिलूंगा।'

मैंने हां कहा और एक गहरी सांस ली। फिर कहा, 'अच्छा सुनो रघु ।'

'PIT?'

‘कॉन्ग्रेट्स। मैंने नए इंवेस्टर्स और लेटेस्ट वैल्यूएशन वाली न्यूज़ पड़ी थी। '

'ओह वो। शुक्रिया।"

"एनीवे, तो पांच दिन बाद मुलाकात होती है।"

*श्योर, केशव?"

"हां।" 'शुक्रिया।'

'वेलकम, रघु।' 'मुझे पता नहीं मैं तुम्हारा यह कर्ज कैसे चुका पाऊंगा। और आई होप, वो उसको फांसी पर लटका दें या उम्रकैद

की सजा दें।'

'हां, उसके साथ यही होगा।' मैंने कहा।

"मैं उसको हर मिनट मिस करता हूं, रघु ने कहा। ओके, अब ये सब सुनने में मेरी कोई दिलचस्पी नहीं, मैं उसे कहना चाहता था, लेकिन कहा नहीं।

'मैंने जारा से कहा था कि इंडिया छोड़ दो। इस सब को यहीं रहने दो। मैं बस...' रघु ने कहा और फूट-

फूटकर रोने लगा। मैं उसके रोने की आवाज़ सुन रहा था।

"रघु, मैं समझता हूं कि तुम क्या महसूस कर रहे हो।" डैम, अब क्या मुझे ये भी करना था? अपनी एक्स को डेट करने वाले बंदे को दिलासा देना?

लेकिन रघु अभी रुका नहीं था। मैं उसे सब कुछ देना चाहता था। ये तमाम अचीवमेंट्स और कॉन्ग्रेच्युलेशंस । अब इन सबका कोई मतलब नहीं रह गया है। उसके बिना जिंदगी अधूरी है। '

"यदि इस सबका कोई मतलब नहीं रह गया है तो वो हमें अपना पैसा दे सकता है, सौरभ ने मेरे कानों में

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